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Karva Chauth 2022 | करवाचौथ की रात ‘छलनी’ से क्यों देखती हैं सुहागनें चांद, ज़रूर जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

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सीमा कुमारी

नई दिल्ली: इस वर्ष ‘करवा चौथ’ (Karwa Chauth) का व्रत 13 अक्टूबर यानी, आज गुरूवार को है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन में सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। 16 श्रृंगार करके पूजा में चांद को छलनी के साथ देखती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्र देव को अर्घ्य देते समय सुहागिन महिलाएं चंद्रमा को क्यों देखती हैं? तो आइए जानें इस पौराणिक रीति-रिवाज के बारे में –

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। साहूकार की बेटी ने मायके में आकर एक बार अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। परंतु पानी पिए बिना निर्जला व्रत रखने के कारण उसकी तबीयत खराब होने लगी। अपनी बहन की खराब तबीयत देखते हुए भाईयों ने उसका व्रत खोलने के लिए एक पेड़ की आड़ में छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीया रख दिया।

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इस जलते हुए दीए को देखकर साहूकार की बेटी ने सोचा की चांद आ गया है और उसने उस जलते हुए दीए को चंद्रमा मानकर अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल दिया। ऐसा माना जाता है कि भाईयों के द्वारा छल के कारण उसका व्रत टूट गया था। जिसके बाद मां करवा साहूकार की बेटी से नाराज हो गई थी। नाराज होकर मां करवा से उसके पति के प्राण हर लिए थे।

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माना जाता है कि साहूकार की बेटी ने छल से अपना व्रत खोलने की मां करवा से क्षमा मांगी और अपनी भूल को सुधारने के लिए उसने अगले साल पूरे विधि-विधान के साथ करवाचौथ का व्रत रखा। दूसरी बार व्रत के दौरान उसने अपने हाथ में छलनी और दीपक लेकर चंद्र देव के दर्शन किए और उन्हें अर्घ्य दिया। छल से बचने के लिए उसने छलनी के साथ चंद्रमा के दर्शन किए। इसलिए करवा चौथ पर छलनी से चांद देखा जाता है। साहूकार की बेटी के द्वारा की गई पूजा से मां करवा प्रसन्न हुई और उन्होंने उसकी बेटी के पति को फिर से जीवित कर दिया।



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