ReligiousThawe Durga Mandir

जाने थावे मंदिर का इतिहास

जाने थावे मंदिर का इतिहास History of Thawe temple

गोपालगंज का थावे दुर्गा मंदिर उत्तर बिहार के उन प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। जहां पर सालभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्र में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

गोपालगंज का फेमस थावे दुर्गा मंदिर चारो तरफ से जंगलो से घिरा हुआ है इस मंदिर में बहुत ही पुराना गर्भगृह है

मां ने जहां दर्शन दिए, वहां एक भव्य मंदिर है. उसके कुछ ही दूरी पर रहषु भगत का भी मंदिर है. मान्यता है कि जो लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं वे रहषु भगत के मंदिर में भी जरूर जाते हैं. तभी उनकी पूजा पूरी मानी जाती है. इसी मंदिर के पास आज भी मनन सिंह के भवनों का खंडहर भी मौजूद है.

थावे मंदिर में पूजा करने कहा कहा से लोग आते है

थावे दुर्गा मंदिर में पूजा करने पुरे बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल से लोग आते है मंदिर में सोमवार और शुक्रवार को भीड़ लगती है

ट्रैन और बस की सुविधा

थावे जंक्शन के लिए ट्रैन चलती है वह से मात्र  2 km की दुरी पे मंदिर है ऑटोरिक्शा ले कर आ  सकते है बस हमेशा सिवान और गोपालगंज के बीच चलती है जिस से बड़े आराम से थावे मंदिर का प्लान बना सकते है|

थावे वाली माता को किन किन नामो से जाना जाता है

माँ थावे वाली माँ को अनेको नामो से जाना जाता है जिनमे प्रुमख नाम जैसे थावे भवानी, सिंहासिनी भवानी, थावे वाली माँ,  और रहषु भवानी नाम प्रचलित है

थावे मंदिर की दुरी Thawe Mandir Distance

गोपालगंज से थावे मंदिर की दुरी 6 किलोमीटर सिवान से गोपालगंज जाने वाली मुख्य मार्ग पे है और सिवान  से  थावे मंदिर की दुरी 24 किलोमीटर है मीरगंज से मंदिर की दुरी 8 किलोमीटर है|

पूजा करने का महत्व

श्रद्धालुओं के अनुसार यहां के लोग किसी भी शुभ कार्य के पूर्व और उसके पूर्ण हो जाने के बाद यहां आना नहीं भूलते. यहां मां के भक्त प्रसाद के रूप में नारियल, पेड़ा और चुनरी चढ़ाते हैं.

गोपालगंज के थावे दुर्गा मंदिर में हमेशा भक्तों का तांता लगा रहता है।

मंदिर व्यवस्था  Thawe temple Arrangement

वगोपालगंज जिला प्रशासन ने मंदिर को खास ढंग से विकसित किया गया है। यहां पर पर्यटन स्थल के लिहाज से गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही मंदिर को चारों तरफ से खूबसूरत और आकर्षक तरीके से सजाया गया है।

थावे मंदिर और रहसु भगत की कहानी Thawe Temple Story 

Thawe mandir ki kahani

इस मंदिर के पीछे एक बहुत ही पुराणी  प्राचीन कहानी है. पौराणिक कथाओ के अनुसार हथुआ के राजा मनन सिंह  थे. उन्हें घमंड था वे अपने आप को मां दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानते थे. घमंड होने के कारण अपने सामने वे किसी को भी मां का भक्त नहीं मानते थे. इसी दौरान राज्य में अकाल पड़ गया और लोग खाने को तरसने लगे. उनके राज्य में चारो तरफ भूखमरी छा गयी।

थावे में रहषु भगत रहते थे, वो माँ  कमाख्या देवी का सच्चे भक्त थे  पौराणिक कथा के अनुसार रहषु मां की कृपा से दिन में घास काटता और रात को उसी से अन्न निकल जाता था. वे बाघ के गले में विषैले सांपों का रस्सी बनाकर धान की दवरी करते थे। खेती-बारी से समय मिलते ही रहसू भगत देवी मां की आराधना में लीन हो जाते थे। जिस कारण वहां के लोगों को अन्न मिलने लगा. लेकिन, इस चमत्कार का राजा को विश्वास नहीं हुआ.

तब रहसु भगत ने राजा मनन सिंह को ऐसा नहीं करने की सलाह दी। रहसु भगत ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो देवी मां के आते ही यहां पर आंधी तूफान शुरू हो जाएगा और यहां की धरती फट जाएगी। सब कुछ तबाह हो जाएगा।

राजा मननसिंह जिद्द के कारण बार बार बोलने पे रहसु भगत ने देवी मां की आराधना शुरू कर दी। देवी दुर्गा माता गौरी कामाख्या भक्त रहसु की आराधना से प्रसन्न होकर कामाख्या से चलकर पटना के पाटन, फिर छपरा के आमी होते हुए गोपालगंज के थावे में पहुंची। देवी मां यहां जैसे ही प्रकट हुईं यहां पर आकाशीय बिजली चमकी और राजा मननसिंह और उसके पूरे राजपाट की तबाही शुरू हो गई। रहसु भगत के सिर को फाड़ कर उसमें से देवी मां का कंगन और हाथ का हिस्सा बाहर निकला। इससे रहसु भगत को जहां मुक्ति मिल गई। वही देवी मां की इसी थावे जंगल में स्थापना कर दी गई। तभी से इस मंदिर में मां की पूजा शुरू हो गई। थावे मंदिर के थोड़ी दूरी पर ही उनके भक्त रहसु भगत का भी मंदिर है, जहां बाघ के गले में सांप की रस्सी बंधी हुई है।

थावे का फेमस मिठाई Thawe famous sweets

थावे का पेड़किया बहुत ही फेमस है हर कोई माता के दर्शन करने के बाद पेड़किया जरूर लेता है क्यों की इसका स्वाद बहुत ही अच्छा होता है रसदार और सूखा होता है शुद्ध खोवा, मेदा, चीनी और शुद्ध घी का बना होता है यहाँ पे गौरी शंकर के नाम से मिठाई की दुकान है

थावे का पेड़किया