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Navaratri 2022 | ‘काशी ब्रह्मचारिणी मंदिर’ के अलावा ‘इन’ मंदिरों के दर्शन मात्र से मां दुर्गा करती हैं मनोकामनाएं पूरी, सद् हृदय से करें आराधना

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‘काशी ब्रह्मचारिणी मंदिर’ के अलावा ‘इन’ मंदिरों के दर्शन मात्र से मां दुर्गा करती हैं मनोकामनाएं पूरी, सद् हृदय से करें आराधना

-सीमा कुमारी

मां दुर्गा के शारदीय नवरात्रि शुरु होने वाले हैं। इस दौरान मां के मंदिरों में भक्तों की काफी भीड़   देखी जाती है। नवरात्रि  के दौरान लोग देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इसके साथ ही भक्त माता रानी के दरबार में दर्शन करने जाते हैं। वैसे तो भारत में माता रानी के ऐसे कई मंदिर हैं, जो बहुत ही प्रसिद्ध हैं। मगर आज हम आपको देवी दुर्गा के 5 मशहूर मंदिरों के बारे में बताते हैं। आइए जानें इन मंदिरों के बारे में-

काशी मां ब्रह्मचारिणी मंदिर

मां ब्रह्मचारिणी का पावन मंदिर वाराणसी में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। खासकर नवरात्रों के दिनों में यहां पर बहुत ही भीड़ देखने को मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा रुप होती हैं। इस मंदिर की यह खासियत है कि जो भक्तजन नवरात्रि के दिनों में यहां आकर पूजा करते हैं। उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।  

मां ब्रह्मचारिणी का यह मंदिर काशी के बालाजी घाट पर स्थित है। बालाजी घाट गंगा का किनारा है  यहां पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। मंदिर श्रद्धालुओं से भी भर जाता है। ऐसा माना जाता है कि रात 2 बजे से ही मंदिर में लाइनें लगनी शुरु हो जाती हैं। मंदिर को लेकर ऐसा कहा जाता है कि यदि भक्त सच्चे दिल से मां की पूजा अर्चना करें तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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कामाख्या शक्तिपीठ

51 शक्तिपीठों में पहले नंबर पर माना जाता है। यह असम की राजधानी गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इस स्थान पर माता सती की योनि गिरी थी। इसलिए हर साल 3 तीनों के दिन यहां माता रजस्‍वला होती हैं। मान्यता है कि देवी मां के इस मंदिर में मांगी गई मन्नत जल्दी ही पूरी हो जाती है।

ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश

देवी दुर्गा का ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थापित है। यह मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथा अनुसार, इस पावन स्थल पर देवी सती की जिह्वा गिरी थी। कहते हैं कि मंदिर की धरती से निकली ज्वाला दिन-रात जलती रहती है। इसलिए यह पावन स्थल  ज्वाला देवी मंदिर के नाम से मशहूर है।

नैना देवी मंदिर, नैनीताल

नैनीताल का नैना देवी मंदिर मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है। कहा जाता है कि माता सती के अग्नि में जलने के बाद विष्णु जी ने उनके शरीर के 51 टुकड़े किए थे। उस दौरान माता की आंखें जिस स्थान पर गिरी थी वहां पर नैना देवी मंदिर स्थापित किया गया। लोग दूर-दूर से देवी मां के नेत्रों के दर्शन करने आते हैं।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित है। मां काली का यह मंदिर ही खूबसूरत बना हुआ है। इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक कहानी है। कथा अनुसार करीब 170 साल पहले जान बाजार की महारानी रासमणि के सपने में मां काली ने दर्शन दिए थे। साथ ही माता रानी ने उन्हे आदेश दिया था कि इस जगह पर उसका मंदिर बनवाया जाए। उसके बाद इस पावन स्थल की स्थापना हुई। देवी काली के इस मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।



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