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5 habits of emotionally strong people metacognition attention shifting self compassion

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हाइलाइट्स

भावनात्मक मजबूत होने पर मुश्किल हालात का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं.
इमोशनली स्ट्रांग होने पर व्यक्ति को बुरे वक्त से उबरने में ज्यादा आसानी होती है.

Habits of Emotionally Strong People: हर किसी शख्स के भीतर कभी न कभी भावनाएं हिलोरे मारती ही हैं. मौका खुशी का हो तो अलग बात है, लेकिन अक्सर मुश्किल वक्त में भावनाओं का सैलाब सा उमड़ता महसूस होता है. जो लोग भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं वे थोड़ी सी भी विपरीत परिस्थिति में खुद पर काबू नहीं रख पाते हैं, वहीं दूसरी अगर अगर कोई शख्स इमोशनली स्ट्रांग है तो वह मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति का भी डटकर सामना कर लेता है और फिर भी भावनात्मक रूप से मजबूत बना रहता है. आप भावनात्मक रूप से मजबूत हैं या नहीं कुछ आदतों की मदद से इसे पहचान सकते हैं.
परिस्थितियों के हिसाब से खुद को कूल बनाए रखना इमोशनली तौर पर मजबूत व्यक्ति की पहचान होती है. nickwignall.medium.com की खबर के मुताबिक इमोशनली स्ट्रांग लोगों में 5 आदतें होती हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में …

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1. मेटाकॉग्निशन – भावनात्मक रूप से मजबूत लोगों में मेटाकॉग्निशन का गुण होता है. मेटाकॉग्निशन यानी अपनी सोच के बारे में ही सोचना. इसका मतलब है कि व्यक्ति में अपने ही विचारों, इमोशन, मूड, एक्सपेक्टेशन जैसे इमोशंस को असेस करने की काबिलियत होती है. ज्यादातर वक्त हमारा दिमाग ऑटोपायलट मोड पर होता है और घटना होती जाती है और हम रिएक्ट करते जाते हैं. इस दौरान इमोशनली स्ट्रांग लोग अपने हर विचार, गतिविधि पर बारीकी से ध्यान केंद्रित करते हैं.

2. अटेंशन शिफ्टिंग – ज्यादातर लोग अपना बहुत सा समय ये सोचने में बिता देते हैं कि क्या चीज़ उनका ध्यान आकर्षित करती है. चाहे वो सोशल मीडिया की बात हो या फिर किसी नई कार के बारे में कल्पना करना. हमारा दिमाग आसानी से एक चीज से दूसरी चीज की तरफ शिफ्ट हो जाता है. बता दें कि आपके विचारों में जो कंटेटे होता है वो ही आपके मूड के कंटेट को निर्धारित करता है. अगर आप हमेशा भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं तो ये आपको काफी घबराहट महसूस करवाता है. इसी तरह अगर आप पुरानी गलतियों को याद करते हैं तो खुद के प्रति शर्मिंदगी महसूस करते हैं. ऐसे में खुद को बेकार के विचारों से दूर करें और अपने अटेंशन को कंट्रोल करना सीखें. इमोशनल स्ट्रांग लोगों की ये एक खूबी है.

3. सेल्फ-कम्पेशन – भावनात्मक तौर पर मजबूत लोगों में सेल्फ-कम्पेशन होता है. यानी वे खुद के प्रति करुणा रखते हैं और अच्छे दोस्त होते हैं. जब आप स्ट्रगल कर रह हैं तो खुद को उस तरह ट्रीट करें जैसे आप अपने किसी अच्छे दोस्त को ट्रीट करते हैं. आप अगर दर्द देने वाले इमोशन को अवाइड करना चाहते हैं तो सेल्प कम्पेशन की प्रैक्टिस करें बजाय के सेल्फ जजमेंटल होने की.

4. इमोशनल टॉलरेंस – इमोशनली स्ट्रांग लोगों में इमोशनल टॉलरेंस काफी होता है. इमोशनल स्ट्रेंथ के मायने हैं कि जब भी आप मुश्किल इमोशल सिचुएशन या मूड में हों तो ऐसी सूरत में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया दें, जिससे इमोशनली आउट ऑफ कंट्रोल न हो सकें. जिंदगी के खराब अनुभव मिलने के बावजूद इससे निकलने की क्षमता इमोशनल टॉलरेंस को दर्शाती है.

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5. एसर्टिव कम्यूनिकेशन – बहुत से लोग एसर्टिव सुनते ही रूखा या गुस्सैल होना सोच लेते हैं लेकिन वास्तविकता में एसर्टिव कम्यूनिकेशन किसी भी तरह से रूड या पल्सी नहीं है. पैसिव कम्यूनिकेशन और एग्रेसिव कम्यूनिकेशन के बीच की हेल्दी कम्यूनिकेशन है एसर्टिव कम्यूनिकेशन. इमोशनली स्ट्रांग लोग एसर्टिव कम्यूनिकेशन का ही सहारा लेते हैं. एग्रेसिव कम्यूनिकेशन में दूसरों की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा जाता है, वहीं पैसिव कम्यूनिकेशन में व्यक्ति अपनी ही जरूरतों का ध्यान नहीं रखता है. वहीं एसर्टिव कम्यूनिकेशन शख्स इमानदारी से अपनी चाहत और जरूरतों को एक्स्प्रेस करता है. वह इस तरह से अपनी बात रखता है जिससे कि दूसरों के लिए भी वो रिस्पेक्टफुल रहे.

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